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कैट द्वारा इस वर्ष हिन्दुस्तानी राखी के आव्हान के तहत वैदिक राखी का इस्तेमाल करने का आग्रह

नई दिल्ली। कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) द्वारा इस वर्ष के राखी त्यौहार को हिन्दुस्तानी राखी के रूप में मनाने के आव्हान को देश के सभी कोनों से व्यापक समर्थन मिला है और बाज़ारों में इस बार चीनी राखी की बजाय भारतीय सामान से बनी राखी की बड़ी मांग है ! कैट के आव्हान के कारण इस बार राखी के त्यौहार पर चीन को 4 हजार करोड़ रुपये की राखी के कारोबार का बड़ा झटका लगा है ! इसी श्रंखला में कैट ने याद दिलाया की पूर्व में घर में बनी राखियों का ही इस्तेमाल हुआ करता था और इसीलिए कैट ने परपंरा को दोबारा शुरू करने के लिए लोगों से इस बार राखी के त्यौहार पर वैदिक राखी के इस्तेमाल करने का आग्रह किया है जिससे भारत की पुरातन संस्कृति भी जीवित हो राखी त्यौहार की पवित्रता भी कायम रहे !

कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री बी सी भरतिया एवं राष्ट्रीय महामंत्री श्री प्रवीन खंडेलवाल ने वैदिक राखी को इस बार इस्तेमाल किये जाने का आग्रह करते हुए कहा की भारत का हर त्यौहार देश की सदियों पुरानी संस्कृति और सभ्यता की कहानी कहता है जिसे देश में अंधाधुन्द पश्चिमीकरण होने के कारण नष्ट -भ्रष्ट कर दिया ! आज इस बात की जरूरत है की भारत के सांस्कृतिक मूल्यों को दोबारा स्थापित किया जाए ! इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए तथा चीन पर देश की निर्भरता को कम करने के उद्देश्य से कैट ने हिन्दुस्तानी राखी का आवाहन किया है !

श्री भरतिया एवं श्री खंडेलवाल ने बताया की रक्षा बंधन को यदि वैदिक रीति से मनाया जाए तो शास्त्रों में उसका बड़ा महत्व है ! प्रत्येक वर्ष सावन की पूर्णिमा पर रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाता है और इस दिन बहनें अपने भाई को रक्षा सूत्र बांधती है ! वैदिक रक्षा सूत्र बहुत आसानी से अपने घर में ही बनाया जा सकता है !

कैट से जुड़े देश के प्रसिद्द विद्वान् और शास्त्रों के ज्ञाता श्री दुर्गेश तारे ने बताया की वैदिक रक्षा सूत्र बनाने के लिए पांच चीज़ें दूर्वा अर्थात घास, अक्षत अर्थात चावल, केसर, चन्दन एवं सरसों के दाने को एक रेशम के कपडे में लेकर उसको बाँधा जाए या उसकी सिलाई की जाए तथा उसके बाद उसमें कलावा पिरोया जाए और इस प्रकार वैदिक राखी तैयार की जा सकती है ! उन्होंने कहा की इन पांच वस्तुओं का विशेष वैदिक महत्व है जो परिवार की रक्षा और आरोग्यता से जुड़ा है ! उन्होंने कहा की जिस प्रकार दूर्वा का एक अंकुर बो देने पर तेज़ी से फैलता है और हज़ारों की संख्या में उग जाता है, उसी प्रकार बहन की प्रार्थना होती है की मेरे भाई का वंश और उसमे सदगुणों का विकास तेज़ी से हो । सदाचार, मन की पवित्रता तीव्रता से बढ़ती जाए। दूर्वा गणेश जी को प्रिय है अर्थात हम जिसे राखी बाँध रहे हैं, उनके जीवन में विघ्नों का नाश हो जाए तथा सभी बड़ों के प्रति हमारी श्रद्धा कभी क्षत-विक्षत ना हो सदा अक्षत रहे !

आचार्य श्री तारे ने बताया की केसर की प्रकृति तेज़ होती है अर्थात हम जिसे राखी बाँध रहे हैं, वह तेजस्वी हो ।उनके जीवन में आध्यात्मिकता का तेज, भक्ति का तेज कभी कम ना हो उसी प्रकार से चन्दन की प्रकृति तेज होती है और यह सुगंध देता है !इसी प्रकार भाई के जीवन में शीतलता बनी रहे, कभी मानसिक तनाव ना हो साथ ही उनके जीवन में परोपकार, सदाचार और संयम की सुगंध फैलती रहे ! सरसों की प्रकृति तीक्ष्ण होती है अर्थात इससे यह संकेत मिलता है कि समाज के दुर्गुणों को, कंटकों को समाप्त करने में हम तीक्ष्ण बनें ।उन्होंने कहा की इस प्रकार इन पांच वस्तुओं से बनी हुई एक राखी को सर्वप्रथम घर में गुरुदेव अथवा परिवार के किसी बड़े के चित्र पर अर्पित हो तथा फिर बहनें अपने भाई को, माता अपने बच्चों को, दादी अपने पोते को शुभ संकल्प करके बांधे ।रक्षा सूत्र बांधते समय ये श्लोक बोलें ” येन बद्धो बलि राजा, दानवेन्द्रो महाबलः-तेन त्वाम रक्ष बध्नामि, रक्षे माचल माचल:

आचार्य श्री तारे ने बताया की महाभारत में यह रक्षा सूत्र माता कुंती ने अपने पोते अभिमन्यु को बाँधी थी ।जब तक यह धागा अभिमन्यु के हाथ में था तब तक उसकी रक्षा हुई, धागा टूटने पर अभिमन्यु की मृत्यु हुई ।इस प्रकार इन पांच वस्तुओं से बनी हुई वैदिक राखी को शास्त्रोक्त नियमानुसार बाँधने से परिवार में सभी बंधु सुखी रहते हैं और रिश्तों की मधुरता बनी रहती है जो भारत की सनातन संस्कृति की एक अभिनव पहचान है !