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दिल्ली में व्यापारियों ने की 10 मई तक स्वैच्छिक लॉक डाउन की घोषणा

  • कैट ने प्रधानमंत्री मोदी से किसी एक केंद्रीय मंत्री को दिल्ली का नोडल मंत्री बनाने का आग्रह किया *
  • सभी बाजार रहेंगे बंद – नहीं होगा कोई कारोबार

नई दिल्ली। दिल्ली की वर्तमान लचर पचार हालत, कोरोना के तेजी से बढ़ते मामले और मेडिकल सुविधाओं का नितांत अभाव को देखते हुए कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय महामंत्री श्री प्रवीण खंडेलवाल ने आज दिल्ली के बृहद हित को सामने रखते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी से आग्रह किया की इन हालातों पर काबू पाने के लिए और दिल्ली के लोगों को कोरोना से बचाने के लिए किसी भी एक केंद्रीय मंत्री को वो दिल्ली का नोडल मंत्री नियुक्त कर दें ! श्री मोदी के किस कदम से जहाँ दिल्ली में विभिन्न सरकारी एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल होगा और सभी मिल कर एक सुदृढ़ योजना के तहत कोरोना पर विजय पाएंगे वहीँ केंद्र एवं राज्य के बीच बेहतर तालमेल बना रहेगा !

इसी बीच देश की राजधानी दिल्ली के सभी प्रमुख व्यापारी संगठनों ने सर्वसम्मति से आगामी 10 मई तक दिल्ली में स्वैच्छिक लॉक डाउन की घोषणा करते हुए कहा की जिस तेजी से कोरोना का संक्रमण बढ़ता ही जा रहा है उसको देखते हुए अभी दिल्ली मैं बाजार और दुकानें खोलने का कोई माहौल नहीं है और जब तक दिल्ली में कोरोना का कहर काबू में नहीं आ जाता तब तक दिल्ली में किसी भी बाजार के व्यापारी संगठन अपनी मार्केट खोलने की स्तिथि में नहीं है !

यह निर्णय कल शाम कैट द्वारा बुलाई गई एक वीडियो कॉन्फ्रेंस मीटिंग में 150 से अधिक प्रमुख व्यापारी संगठनों के नेताओं ने सर्वसम्मति से लिया ! हालाकिं कैट एवं अन्य व्यापारी संगठनों ने उम्मीद जताई है की श्री दिल्ली के उपराजयपाल श्री अनिल बैजल एवं मुख्यमंत्री श्री अरविन्द केजरीवाल वर्तमान गंभीर हालातों को देखते हुए कैट द्वारा लॉक डाउन आगे बढ़ाने की मांग को स्वीकार करते हुए लॉक डाउन बढ़ाने की घोषणा करेंगे !

श्री खंडेलवाल ने उपराजयपाल श्री अनिल बैजल के कोरोना ग्रसित होने पर दिल्ली के व्यापारियों की ओर से उन्हें शीघ्र स्वस्थ होने की शुभकामना देते हुए कहा की उनके साथ दिल्ली के 15 लाख व्यापारियों की दुआएं जुडी हैं !

कैट के प्रदेश अध्यक्ष श्री विपिन आहूजा एवं प्रदेश महामंत्री श्री देवराज बवेजा ने बताया की स्वैच्छिक लॉक डाउन में दिल्ली के सभी व्यापारिक संगठन जिसमें विशेष रूप से नई दिल्ली ट्रेडर्स एसोसिएशन, कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ सदर बाजार ट्रेडर्स एसोसिएशन, चांदनी चौक सर्व व्यापार मंडल, दिल्ली उद्योग व्यापार मंडल, किराना मर्चेंट्स एसोसिएशन, दिल्ली ड्रग डीलर्स एसोसिएशन दिल्ली ग्रेन मर्चेंट्स एसोसिएशन, ऑटोमोटिव पार्ट्स मर्चेंट्स एसोसिएशन, दिल्ली आयरन एंड हार्डवेयर मर्चेंट्स एसोसिएशन, लाजपत नगर ट्रेडर्स एसोसिएशन, करोल बाग़ ट्रेडर्स एसोसिएशन, दिल्ली स्कूटर पार्ट्स डीलर्स एसोसिएशन, ईस्ट दिल्ली जूलर्स एसोसिएशन, यमुनापार ट्रेडर्स एसोसिएशन, अशोक विहार व्यापार मंडल,दिल्ली ड्रग्स डीलर्स एसोसिएशन, मोबाइल डीलर्स एसोसिएशन, सेंट्रल रेडियो एंड इलेक्ट्रॉनिक्स मर्चेंट्स एसोसिएशन, दिल्ली सर्जिकल डीलर्स एसोसिएशन, रोहिणी व्यापार मंडल, जगतपुरी ट्रेडर्स एसोसिएशन, दिल्ली साइकिल डीलर्स एसोसिएशन, आल इंडिया टॉय मैनुफक्चरर्स एसोसिएशन, फेडरेशन ऑफ़ साउथ दिल्ली ट्रेडर्स एसोसिएशन, राजौरी गार्डन ट्रेडर्स एसोसिएशन, पश्चिमी दिल्ली व्यापार मंडल, केमिकल मर्चेंट्स एसोसिएशन सहित अन्य सभी बड़े व्यापारी संगठन शामिल हैं !

श्री खंडेलवाल ने कहा की दिल्ली की वर्तमान स्थिति को बेहद बदहाल बताते हुए दिल्ली उच्च न्यायलय द्वारा दिल्ली सरकार कोबेहड़ अक्षम करार देने पर कहा की इस टिपणी से पता चलता है की पिछले वर्तमान दिल्ली सरकार कोरोना की भयानकता को भांपने में फेल हो गई जिसका खामियाजा आज पूरी दिल्ली भुगत रही है और लोग बिना इलाज़ के मर रहे हैं !

श्री खंडेलवाल ने दिल्ली सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा है की यदि समय रहते तुरंत कदम नहीं उठाये गए तो दिल्ली में कोरोना का खतरा जल्दी ख़त्म होने के आसार नहीं है ! देश के संविधान के द्वारा लोगों के जीने के अधिकार से दिल्ली के लोगों को वंचित किया जा रहा है ! इसकी जिम्मेदारी किसकी है, यह तय होना चाहिए ! उन्होंने कहा की यदि व्यापारी किसी भी क़ानून की पालना करने में असफल रहते हैं तो सरकार उनके खिलाफ तुरंत कार्रवाई करती हैं लेकिन सरकार द्वारा इस प्रकार की लापरवाही के लिए क्यों नहीं जिम्मेदार लोगों को दण्डित किया जाए !

श्री खंडेलवाल ने कहा की लाख कोशिशों के बावजूद भी दिल्ली में पिछले एक सप्ताह में चिकित्सा व्यवस्था में कोई परिवर्तन नहीं आया है !अस्पतालों में बेड की कमी, ऑक्सीजन की किल्लत, कोरोना सम्बंधित दवाइयों का न मिलना, ऑक्सीजन कॉन्सेंट्रेटर का अभाव आदि की स्तिथि पूरे तौर पर बनी हुई है ! यदि दुकानें खुलती हैं और यदि किसी व्यापारी, उनके कर्मचारी अथवा ग्राहक कोरोना से ग्रसित हो गए तो वर्तमान हालातों में आवश्यक चिकित्सा मिलना बहुत मुश्किल है और इसलिए बेहतर है की जब तक कोरोना की रफ़्तार में कमी न आ जाए अथवा चिकित्सा सुविधाएँ न सुधर जाएँ तब तक दिल्ली के बाज़ार नहीं खुलने चाहियें !