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स्ट्रीट वेंडर्स के सपनों को साकार करने की पहल

दुर्गाशंकर मिश्रा
सचिव, आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय भारत सरकार
     किसी भी राष्ट्र की उन्नति उस राष्ट्र के लोगों की समृद्धि व खुशहाली पर निर्भर करती है। समृद्धि व खुशहाली का सीधा संबध आत्मनिर्भरता से है। कोई भी राष्ट्र तब तक आत्मनिर्भर नहीं हो सकता जब तक उस राष्ट्र का छोटे से छोटा व्यक्ति आत्मनिर्भर नहीं होगा। किसी भी राष्ट्र की सभी छोटी इकाई यदि आत्मनिर्भर है तो उस राष्ट्र को प्रगति के पथ पर आगे बढऩे से कोई नहीं रोक सकता। आत्मनिर्भर भारत को लेकर प्रधानमत्री नरेन्द्र मोदी की जो दृष्ट है उसके मूल में देश की खुशहाली व समृद्धि ही है। 
    देश के आर्थिक विकास में यदि बड़े उद्योगों, कृषि व लघु उद्योगों की महत्वपूर्ण भूमिका है तो सड़कों के किनारे रेहड़ी ठेली लगाकर अपना जीवन यापन करने वाले स्ट्रीट वेन्डर्स की भूमिका से भी इंकार नहीं किया जा सकता। यह वह वर्ग है जो केवल अपनी आर्थिक आवश्यकताओं की ही पूर्ति नहीं करता बल्कि आम जनमानस की तमाम आवश्यकताआें की पूर्ति करता है। करोड़ों रुपये का कारोबार प्रतिदिन देश भर में इन स्ट्रीट वेन्डर्स द्वारा किया जाता है। जब भी देश के विकास की बात की जाती रही है तो विकास के नाम पर स्ट्रीट वेन्डर्स के उत्थान की कोई बड़ी पहल दिखाई नहीं दी है नतीजतन आजादी के 70 वर्ष बाद भी यह वर्ग अपने जीवन यापन व अस्तित्व के लिये संघर्ष करता दिखाई देता है।
     प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत मिशन के तहत पहली बार देशवासियों की सेवा करने वाले इस वर्ग को अपने पैरों पर खड़ा कर स्वावलंबी बनाने की कोशिश की गई है।  प्रधानमंत्री  के आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को साकार करने की दिशा में शहरी क्षेत्रों के पथ विक्रेताओं, जिन्हें स्ट्रीट वेंडर, हंकर, ठेलेवाला, रेहड़ीवाला, ठेलीफाड़वाला इत्यादि नामों से जाना जाता है,  इन सभी को आत्मनिर्भर बनाने के लिए भारत सरकार की एक नई योजना पीएम स्वनिधि 1 जून, 2020  को शुरू की गई है। शहरी अर्थव्यवस्था में सब्जियां, फल, फूल, फास्ट फूड, चाय—पकौड़ा, पावरोटी—अंडा, पावभाजी, आइसक्रीम—कुल्फी, पान, कपड़े, जूते—चप्पल, हस्तशिल्प, कंपी—किताबें आदि अथवा नाई, लाण्ड्री, जूता चप्पल मरम्मत आदि की सेवा सुविधा प्रदान करने वाले अत्यन्त लघु उद्यमी (नैनो इंटरप्रेन्योर्स) को आसान किस्तों में कार्य पूँजी ऋणदायी संस्थाआें द्वारा उपलब्ध कराने की भारत सरकार की यह आजादी के बाद की पहली योजना है ।
    इस योजना के तहत एक वर्ष में 50 लाख स्ट्रीट वेंडर्स को आसान किस्तों व आसान शर्तो पर ऋण उपलब्ध कराकर आत्मनिर्भर बनाने की योजना है। योजना का लाभ वास्तविक स्ट्रीट वेंन्डर्स को मिले इसके लिये लाभार्थियों का चयन, ऋण प्रक्रिया एवं प्रबंध सूचना प्रोद्योगिकी के  Information Technology  के माध्यम से बहुत आसान किया गया है ताकि पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे और अधिक से अधिक लोग इसका लाभ उठा सकें। इस योजना को स्ट्रीट वेंडर्स से जोडने और उन तक इसका लाभ पहुंचाने के लिये  'वेब पोर्टल pmsvanidhi.mohua.gov.in तथा सहज-सुविधायुक्त 'मोबाइल एप भी शुरु किया गया है। लगभग एक माह में ही  अब तक विगत लगभग 30 दिनों में 8 लाख से अधिक स्ट्रीट वेन्डर्स ने ऋण के लिये आवेदन किया है जिनमें से लगभग 2 लाख से अधिक स्ट्रीट वेन्डर्स के ऋण आवेदन स्वीकृत भी हो चुके हैं तथा लगभग 75 हजार हजार ऋण वितरित भी कर दिये गये हैं।
 इस योजना की एक खासियत यह भी है कि इसका लाभ शहरी क्षेत्रों में काम करने वाले स्ट्रीट वेंडर्स को तो मिलेगा ही, आस पास के ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले स्ट्रीट वेंन्डर्स को भी इसका लाभ मिलेगा। समूचे देश के सभी राज्यों व केन्द्र शासित प्रदेशों के स्ट्रीट वेन्डर्स के लिये यह अनोखी पहल है, इस पहल का लाभ उठाने के लिये जिस तरह पहले दिन से ही स्ट्रीट वेंडर्स आगे आ रहे हैं उसे देखते हुए उम्मीद की जा रही है कि एक साल में 50 लाख स्ट्रीट वेन्डर्स को ऋण देने का लक्ष्य एक वर्ष से पहले ही प्राप्त हो जायेगा। दरअसल स्ट्रीट वेंडर्स व गरीब रेहड़ी पटरी वालों के सामने बैंक में प्रतिभूति के रूप में जमा करने के लिये कुछ नहीं होता, यही कारण है कि इस योजना में  कार्य पूंजी ऋण के लिए किसी भी प्रकार की प्रतिभूति (collateral security)  की आवश्यकता नहीं है।
    कोई भी स्ट्रीट वेंडर  एक साल की अवधि का 10,00 रूपये का ऋण प्राप्त कर सकता है। स्ट्रीट वेन्डर्स को प्रोत्साहन के लिये इस योजना में यह भी प्रावधान किया गया है कि यदि ऋण लेने वाला स्ट्रीट वेंडर  समय पर या समय से पहले जमा कर देता है तो  7प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से त्रैमासिक ऋण अनुदान (Interest Subsidy) ऋण लेने वाले स्ट्रीट वेंडर्स के सीधे खाते में जमा हो जाएगा। और इसके बाद वह इससे बड़ी पूंजी यानि 20,000 रुपये और  फिर 50,000 के ऋण भी प्राप्त कर सकेगा जिससे उसका आर्थिक उत्थान होगा। आजकल सभी के हाथ में मोबाइल है ऐसे में इस योजना के अंतर्गत लाभान्वित वेंडर्स यदि डिजिटल पेमेंट करते हैं तो  200 से ज्यादा ट्रांजेक्शन पर उन्हें अधिकतम 100 रुपये प्रति माह नकद उनके खाते में वापस किया जाएगा। इस योजना के एक बड़ी विशेषता यह है कि यदि ऋण अनुदान एवं नकद भुगतान कोई प्राप्त करता है तो उसे अगला ऋण बिना ब्याज के प्राप्त होगा और अलग से 2़.5 प्रतिशत या अधिक अनुदान भी मिलेगा। 
   इस योजना में बैंकों का भी ख्याल रखा गया है। योजना में भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक  की क्रेडिट गारंटी   के द्वारा बैंकों को बिना किसी प्रवेश शुल्क के 5 प्रतिशत तक नुकसान पर 10 प्रतिशत एवं 5—15 प्रतिशत नुकसान पर 75 प्रतिशत पोर्टफोलियो की क्रेडिट गारंटी दी गई है । ऋण की सुविधा सीधे स्ट्रीट वेंडर को उसके दरवाजे पर मिलेगी यानि बैंकों के बिजनेस प्रतिनिधि या एमएफआईध्एनबीएफसी के एजेंट ऋण आवेदन लेना, ऋण स्वीकृत करना, धनराशि मुहैया कराना एवं किश्तों की धनराशि वापस लेने आदि सारे कार्य सीधे वेंडर के दरवाजे पर किए जाएंगे। इससे वेंडर्स को बहुत सहूलियत एवं सुविधा मिलेगी ताकि उनका व्यवसाय प्रतिकूल प्रभावित न हो सके । सरकार ने 30 सितंबर, 2020  तक 10८ शहरों में योजना को   शत प्रतिशत लागू करने के विशेष प्रयास  शुरु किये हैं। 
  कोरोना संकट व लकडाउन के कारण जिन स्ट्रीट वेंडर्स को नुकसान हुआ है वह शहरी स्थानीय निकाय या बैंक से संपर्क करके योजना का लाभ लेकर कार्य पूंजी का प्रयोग कर दोबारा अपने व्यवसाय को तेजी से आगे बढा सकते हैं। निश्चित रूप से यह गरीब स्ट्रीट वेंडर्स के जीवन को बदलने की एक कोशिश है, उम्मीद है कि इस योजना से देश के लाखों स्ट्रीट वेंडर्स का जीवन संवरेगा और वह आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना को साकार करेंगे।