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क्या इथेनॉल की खपत ने बढ़ा दी चीनी की कीमतें

  • एक माह में लगभग 8 रुपये​ किलो बढ़ गई चीनी की कीमत


देश मे पेट्रोल में ईथेनॉल की मात्रा 20 प्रतिशत बढ़ाने के बाद ई—20 नाम से बेचे जा रहे पेट्रोल की गुणवत्ता को लेकर अभी सवाल थमे नहीं हैं लेकिन अब एक नया सवाल बाजार में चीनी की बढ़ती कीमतों को लेकर उत्पन्न हो गया है। त्यौहारों का सीजन अभी शुरु नहीं हुआ है और बाजार में चीनी की कीमत बढ़ने लगी है। पिछले एक माह में चीनी की कीमत 8 रुपये प्रति किलो से ज्यादा बढ़ गई है। 20 जुलाई 2026 को बाजार में चीनी की कीमत ₹48.18 प्रति किलोग्राम थी, जो 20 अगस्त 2026 को बढ़कर ₹55.70 प्रति किलोग्राम हो गई।

क्या ई—20 पेट्रोल मे मिश्रण के लिये इथेनॉल की बढ़ती आवश्यकता चीनी की कीमतों के बढ़ने का कारण है,यह एक बड़ा सवाल है। यह सच है कि ई—20 पेट्रोल की बिक्री शुरु करने के बाद पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल का मिश्रण किया जा रहा है जिससे इथेनॉल की आवश्यकता बढ गई है। यह सवाल इसलिये भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह माना जाता है कि भारत में इथेनॉल के लिये चीनी व गन्ने का इस्तेमाल भी किया जाता है। चीनी की बढ़ती कीमतों से अब तक ई—20 पेट्रोल की बिक्री का विरोध कर रहे आलोचकों को आलोचना का अब एक नया कारण भी मिल गया है। जिस तरह ई—20 पेट्रोल को लेकर उठाये जा रहे सभी सवालों को सरकार केवल भ्रम बता रही है उसी तरह सरकार चीनी की बढ़ती कीमतों के ​पीछे भी इथेनॉल के इस्तेमाल से इन्कार करती है।

केन्द्रीय खाद्य आपूर्ति एवं सावर्जनिक वितरण मंत्रालय का कहना है कि चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी के लिए इथेनॉल को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता और चीनी की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी को इथेनॉल उत्पादन के लिए चीनी के इस्तेमाल से जोड़ना गलत है। सरकार का तर्क है कि असल में, इथेनॉल के लिए इस्तेमाल होने वाली चीनी का हिस्सा 2022-23 में लगभग 12% से घटकर 2025-26 में लगभग 9% हो गया है। इसके अलावा, देश में उत्पादित होने वाले इथेनॉल का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा अब अनाज, खासकर मक्के से आता है।

मंत्रालय के अनुसार चीनी की कीमतों में मौजूदा बढ़ोतरी कई वजहों से हो रही है, जिनमें उम्मीद से कम घरेलू उत्पादन, त्योहारों के मौसम से पहले बढ़ती मांग, मौसम की वजह से गन्ने की फसल को नुकसान, दुनिया भर में चीनी की आपूर्ति में कमी और उद्योग जगत के कुछ हिस्सों द्वारा सट्टेबाजी और जमाखोरी शामिल हैं। चीनी की बढ़ती कीमतों के पीछे एक तर्क यह भी दिया जा रहा है कि इस वर्ष गन्ने में रेड रॉट और टॉप बोरर बीमारी के साथ-साथ ज़्यादा बारिश से जलभराव के कारण उत्पादन पर असर पड़ा है। शुरुआती अनुमानों से कम चीनी उत्पादन हुआ है और मौजूदा सीज़न में चीनी का उत्पादन लगभग 306 एलएमटी होने की उम्मीद है, जबकि गन्ना उगाने वाले राज्यों का शुरुआती अनुमान लगभग 343 एलएमटी था।

सरकार का तर्क है कि दुनिया भर में भी चीनी की कीमतें बढ़ीं हैं और चीनी की आपूर्ति में कमी एक वैश्विक प्रक्रिया है और यह सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है। वर्ष 2026-27 के लिए वैश्विक स्तर पर चीनी की कमी का अनुमान लगभग 33 एलएमटी लगाया गया है। अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में चीनी की कीमतें तेज़ी से बढ़ी हैं। यह 30 जून 2026 को $474 प्रति टन से बढ़कर 20 अगस्त 2026 को $552 प्रति टन हो गईं, यानी दो महीने से भी कम समय में 16% से ज़्यादा की बढ़ोतरी हुई है।

सरकार का तर्क है कि एथेनॉल कार्यक्रम ने किसानों की मदद की और चीनी मिलों को मज़बूत बनाया है। भारत में आम तौर पर सालाना लगभग 320-340 एलएमटी चीनी का उत्पादन होता है, जबकि घरेलू खपत लगभग 280-290 एलएमटी है। ज़्यादा उत्पादन वाले सालों में, अतिरिक्त स्टॉक चीनी मिलों के फंड को ब्लॉक कर देता है और गन्ना किसानों को भुगतान में देरी हो सकती है। अतिरिक्त चीनी को एथेनॉल की ओर डायवर्ट करने से इस समस्या को हल करने में मदद मिली है और चीनी मिलों की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है। सरकार का कहना है कि इथेनल कार्यक्र्म के चलते 20 अगस्त 2026 तक, 2025-26 चीनी सीज़न के लिए गन्ना किसानों का 97% बकाया भुगतान किया जा चुका है और चीनी मिलों की बेहतर आर्थिक स्थिति ने सरकारी मदद पर उनकी निर्भरता भी कम कर दी है। जहाँ 2014 और 2021 के बीच चीनी उद्योग को लगभग ₹14,600 करोड़ की सब्सिडी दी गई थी, वहीं 2021-22 के बाद से ऐसी कोई सब्सिडी घोषित नहीं की गई है।

सरकार ने स्वीकार कियाहै कि कुछ चीनी मिलों और व्यापारियों की सट्टेबाज़ी और जमाखोरी की वजह से हाल ही में कीमतें बढ़ी हैं यही कारण है कि पूरे देश में चीनी डीलरों पर 1 अगस्त से 30 नवंबर 2026 तक 400 टन की स्टॉक लिमिट लगाई गई है। 1 सितंबर से, थोक उपभोक्ताओं को 15 दिन की खपत से ज़्यादा चीनी का स्टॉक रखने की इजाज़त नहीं होगी। इसके अलावा सरकार ने एहतियात के तौर पर, सरकार ने घरेलू उपलब्धता को और बढ़ाने के लिए 10 एलएमटी कच्ची चीनी के ड्यूटी-फ्री आयात की इजाजत देने का फ़ैसला किया है। ​जिससे चीनी की कीमते स्थिर रहने की उम्मीद है।