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देश भर में इस वर्ष रखी का कारोबार 25 हज़ार करोड़ रुपए का होने का अनुमान

रक्षाबंधन पर स्वदेशी राखियों की बढ़ती मांग, ‘विकसित भारत’ और ‘मोदी गारंटी’ राखियां बनीं आकर्षण का केंद्र : प्रवीन खंडेलवाल

नई दिल्ली। इस वर्ष रक्षाबंधन का पर्व केवल भाई-बहन के अटूट प्रेम का प्रतीक नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत, स्वदेशी उत्पादों के प्रति बढ़ते विश्वास और राष्ट्रभावना का भी उत्सव बन गया है। देशभर के बाजारों में स्वदेशी राखियों की जबरदस्त मांग देखी जा रही है और विभिन्न राज्यों में तैयार की गई विशिष्ट भारतीय राखियां उपभोक्ताओं का विशेष आकर्षण बनी हुई हैं।

कैट के राष्ट्रीय महामंत्री एवं सांसद प्रवीन खंडेलवाल ने कहा कि इस वर्ष रक्षाबंधन के अवसर पर देशभर में लगभग ₹ 25 हज़ार करोड़ के व्यापार का अनुमान है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 45 प्रतिशत अधिक है जबकि उपहार, मिठाई, वस्त्र एवं अन्य त्योहारी उत्पादों को मिलाकर कुल व्यापार ₹30 हज़ार करोड़ से अधिक तक पहुंच सकता है।पिछले वर्ष राखी का व्यापार देश भर में लगभग 17 हज़ार रुपए का हुआ था वहीं वर्ष 2023 में यह व्यापार 12 हज़ार करोड़ रुपये का हुआ जबकि मिठाई, उपहार तथा पैकिंग का व्यापार इससे अलग था।

खंडेलवाल ने कहा कि यह भारतीय उत्पादों के प्रति उपभोक्ताओं के बढ़ते विश्वास और प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’, ‘लोकल फॉर ग्लोबल’ एवं ‘आत्मनिर्भर भारत’ के आह्वान की बड़ी सफलता है।

खंडेलवाल ने बताया कि इस वर्ष बाजारों में पारंपरिक राखियों के साथ-साथ प्रधानमंत्री मोदी की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं, राष्ट्रीय उपलब्धियों एवं विकसित भारत के संकल्प से प्रेरित विशेष थीम आधारित राखियों की भारी मांग है। इनमें ‘विकसित भारत राखी’, ‘मोदी गारंटी राखी’, ‘ब्रह्मोस राखी’, ‘आत्मनिर्भर भारत राखी’, ‘वोकल फॉर लोकल राखी’, ‘भारत गौरव राखी’, ‘नारी वंदन राखी’, ‘लखपति दीदी राखी’, ‘नमामि गंगे राखी’, ‘राष्ट्र रक्षा सूत्र राखी’ और ‘अमृतकाल राखी’ विशेष रूप से लोकप्रिय हो रही हैं।

कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री बी सी भरतिया ने कहा कि इन राखियों के माध्यम से बहनें केवल रक्षा सूत्र ही नहीं बांध रही हैं, बल्कि राष्ट्र निर्माण, महिला सशक्तिकरण, स्वदेशी अभियान, पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति अपनी भावनाओं को भी अभिव्यक्त कर रही हैं। विशेष रूप से युवाओं और बच्चों में ‘ब्रह्मोस राखी’, ‘राष्ट्र रक्षा सूत्र राखी’ और ‘विकसित भारत राखी’ को लेकर उत्साह देखा जा रहा है।

श्री भरतिया ने कहा कि देश के विभिन्न क्षेत्रों की कला, संस्कृति और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने वाली राखियां भी बाजारों में खूब पसंद की जा रही हैं। नागपुर की खादी राखी, जयपुर की सांगानेरी कला राखी, पुणे की सीड राखी, असम की चाय पत्ती राखी, कोलकाता की जूट राखी, मुंबई की सिल्क राखी, बिहार की मधुबनी राखी, बेंगलुरु की पुष्प राखी तथा अन्य अनेक स्वदेशी राखियां भारतीय हस्तशिल्प और स्थानीय उद्यमिता की पहचान बन रही हैं।

कैट के राष्ट्रीय चेयरमैन श्री बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि देशभर के व्यापारियों और उपभोक्ताओं से अपील की कि वे रक्षाबंधन सहित आगामी सभी त्योहारों पर भारतीय उत्पादों को प्राथमिकता दें और ‘स्वदेशी अपनाओ – भारत बढ़ाओ’ अभियान को और अधिक मजबूत बनाएं। देश में भारतीय अर्थव्यवस्था, कुटीर उद्योगों, हस्तशिल्प और लघु उद्यमों को नई ऊर्जा मिल रही है जिससे “ भारत बनाये- दुनिया अपनाएं” का कैट का संकल्प मजबूत हो रहा है ।

देशभर के बाजारों में इस वर्ष भी चीनी राखियों की कोई मांग नहीं है। व्यापारियों एवं उपभोक्ताओं ने पूरी तरह स्वदेशी राखियों को अपनाया है और बाजारों में केवल भारतीय निर्मित राखियां ही उपलब्ध हैं।

श्री खंडेलवाल ने कहा की कैट देश के विभिन्न शहरों में विशेष स्वदेशी मेले आयोजित करने जा रहा हैं, जहां महिला उद्यमियों, स्वयं सहायता समूहों और स्थानीय कारीगरों द्वारा निर्मित राखियों एवं अन्य उत्पादों की बिक्री की जाएगी।

उन्होंने कहा कि नागपुर की खादी राखी,
जयपुर की सांगानेरी कला राखी, पुणे की सीड (बीज) राखी, कोलकाता की जूट रखी, जनजातीय हस्तकला से बनी बांस राखी,असम की चाय पत्ती राखी, मुंबई की सिल्क राखी, मुंबई कानपुर की मोती (पर्ल) राखी बड़ी संख्या में बाजारों में बिक रही है और छोटे कारीगरों, हस्त कला के लोगों को बड़ा बाज़ार मिल रहा है।

कैट का मानना है कि स्वदेशी उत्पादों के प्रति बढ़ते रुझान और “वोकल फॉर लोकल” अभियान के कारण भारतीय कारीगरों, महिला उद्यमियों, लघु उद्योगों और स्थानीय व्यापारियों को इस रक्षाबंधन पर बड़ा आर्थिक लाभ मिलेगा।