Press "Enter" to skip to content

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन : वैश्विक क्षितिज पर भारत का बढ़ता प्रभुत्व

 राजधानी दिल्ली में हो हुए 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन ब्रिक्स देशों के लिये ही नहीं बल्कि भारत के लिये भी उपलब्धियों भरा रहा है। इस सम्मेलन के जरिए जहां विश्व को अपनी ताकत दिखाने में कामयाब रहा वहीं वैश्विक क्षितिज पर भारत का प्रभुत्व बढ़ा है। शिखर सम्मेलन में साझा घोषणापत्र जारी करना जहां एक भारत के लिये एक बड़ी उपलब्धि रही तो वहीं शिखर सम्मेलन में चीन सहित अन्य सदस्य देशों ने जिस तरह भारत के प्रस्ताव पर पहलगाम आतंकवादी हमले की निंदा की ओर आतंकवाद के लिये फंडिंग के खिलाफ सहमति व्यक्त की उससे भारत आतंकवाद को एक तरह से वैश्विक मुददा बनाने में भी सफल रहा है।

ब्रिक्स का मुख्य उद्देश्य वैश्विक स्तर पर विकासशील देशों की आवाज़ को मजबूत करना और आर्थिक, राजनीतिक तथा सांस्कृतिक क्षेत्रों में आपसी सहयोग को बढ़ावा देना है लेकिन यहां यह महत्वपूर्ण यह भी है कि ब्रिक्स में जो भी देश शामिल हैं वह सभी आर्थिक क्षेत्र में अमेरिका की दादागिरी को खत्म करना चाहते हैं। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के पहले ही दिन रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का भाषण हो या फिर ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन का भाषण रहा हो उसमें यूरोपीय देशों व अमेरिका की दादागिरी का जिस तरह जिक्र किया गया है उससे​ ब्रिक्स की ताकत का संदेश इन दोनों नेताओं ने पश्चिमी जगत को दिया है।
दरअसल ब्रिक्स देशों में शामिल रूस हो या फिर ईरान दोनो इस समय युद्ध के चक्रव्यूह में फंसे है। यह जगजाहिर है कि यदि अमेरिका चाहे तो ये युद्ध समाप्त हो सकते हैं। रूस व यूक्रेन के बीच युद्ध शुरु हुए लगभग चार वर्ष से अधिक समय हो गया है। उधर ईरान रोजाना जहां एक ओर अमेरिका की बमबारी को झेल रहा है तो साथ ही आर्थिक प्रतिबंध भी झेल रहा है।


अमेरिका—ईरान एवं रूस—यूक्रेन युद्धों के बीच भारत में हुआ 18वां ब्रिक्स​ शिखर सम्मेलन यूक्रेन—रूस व अमेरिका—ईरान युद्ध के परिपेक्ष्य में भी निश्चित रूप से महत्वपूर्ण है। हालांकि इस​ शिखर सम्मेलन का उददेश्य ब्रिक्स देशों के बीच व्यापारिक व आर्थिक साझेदारी को मजबूत बनाना है लेकिन युद्धों की विभिषिका के बीच इस शिखर सम्मेलन से शांति का कोई रास्ता निकलने की उम्मीद जगी है। भारत वसुधैव कुटुम्बकम एवं विश्व शांति का पक्षधर है और सुखद यह है कि ईरान व रूस के साथ साथ अमेरिका व ईजराइल के साथ भी भारत के अच्छे संबध है, ऐसे में भारत की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है,यही कारण है कि ब्रिक्स के मंच से प्रधानमंत्री मोदी ने यूरोपीय देशों व अमेरिका के खिलाफ कुछ बोलने के बजाय ब्रिक्स देशों के बीच आर्थिक संबधों को मजबूत बनाने की ही बात की और साथ ही शांति प्रयासों में सहायता की पहल की।


शिखर सम्मेलन के पहले दिन रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिग एवं ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन सहित विभिन्न देशों के राष्ट्राध्यक्षों के साथ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने द्विपक्षीय बातचीत की। इस बातचीत में मुख्य एजेंडा भले ही आर्थिक साझेदारी को मजबूत बनाना रहा हो लेकिन सूत्रों के अनुसार बातचीत के केन्द्र में युद्ध समाप्त करने के लिये कूटनीतिक व बातचीत के जरिए शांति का रास्ता तलाशने पर भी भारत ने बल दिया है। प्रधानमंत्री मोदी ने इस बातचीत के दौरान एक बार फिर दोहराया कि बातचीत और कूटनीति ही संघर्षों को हल करने में आगे बढ़ने का रास्ता है और भारत शांति प्रयासों में सहायता के लिए तैयार है। भारत की इस पहल के बाद उम्मीद तो यही की जा रही है कि ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के जरिए भारत वैश्विक शांति का अग्रदूत बनकर सामने आयेगा।