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एशियन गेम्स 2026 : उपलब्धियां भी और निराशा भी

  • एशियन गेम्स 2023 से 2026 तक भारतीय सफर
  • वर्ष 2023 की तुलना में पदक तो कम हुए पर भारत ने चौथे स्थान को रखा बरकरार

जापान मे हुए एशियन गेम्स में इस बार वर्ष 2023 की तुलना में पदकों की संख्या में हालांकि कुछ कमी हुई लेकिन भारतीय खिलाड़ियों ने सभी खेलों में उत्कृष्ट दमखम का प्रदर्शन करते हुए पदक तालिका में अपने वर्ष 2023 के चौथे स्थान को बरकरार रखा है। चीन, जापान और दक्षिण कोरिया भारत से आगे रहे है। भारतीय खिलाड़ियों ने वर्ष 2014 के बाद विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं में जिस तरह का प्रदर्शन किया है उससे खेल जगत में निश्चित रूप से भारत की साख बढ़ी है।

वर्ष 2023 में हांगझोउ में हुए एशियाई खेलों में भारत ने इतिहास रचते हुए पहली बार 100 से अधिक पदक जीते थे। उस दौरान भारतीय खिलाड़यों ने ने कुल 107 पदक हासिल किए, जिसमें 28 स्वर्ण, 38 रजत और 41 कांस्य पदक शामिल थे। अब तीन साल बाद जापान के आइची-नागोया में हुए एशियन गेम्स 2026 में भारत ने 21 स्वर्ण, 27 रजत और 37 कांस्य सहित कुल 85 पदक जीते। भारत ने 2023 की तुलना में 22 पदक कम जीते लेकिन यह आंकड़ों का तुलनात्मक अध्ययन भारतीय खिलाड़ियों के दमखम की एक अलग ही तस्वीर दिखाता है।

वर्ष 2023 की तुलना में 2026 में भारत के कुल पदकों में 22 पदकों की कमी आई। यह लगभग 20.6 प्रतिशत की गिरावट है। स्वर्ण पदकों की संख्या 28 से घटकर 21 हुई और इसमें 7 पदकों की कमी आई। रजत पदकों की संख्या 38 से घटकर 27 हुई जिसमें 11 पदकों की कमी हुई और कांस्य पदकों की संख्या 41 से घटकर 37 हुई और इसमें 4 पदकों की कमी हुई। पिछले एशियन गेम्स से 22 पदक कम हासिल करने के बावजूद यदि भारत ने वर्ष 2023 के अपने चौथे स्थान को बरकरार रखा है तो इससे इतना तो स्पष्ट है कि पदकों की संख्या कम होने के कुछ अन्य कारण भी रहे होंगे।

यहां यह भी बताना जरुरी है कि वर्ष 2014 में जब देश में एनडीए की सरकार बनी थी तो उस वर्ष हुए एशियन गेम्स में भारत को मात्र कुल 57 पदक मिले थे और भारत पदक तालिका में आठवें स्थान पर रहा था। इसके बाद से ही खेलों को भारत सरकार ने प्राथमिकता पर लिया और पदक तालिका में भारत का स्थान लगातार उपर होता रहा जो वर्ष 2023 में 107 पदकों के साथ उच्चतम स्तर पर था। वर्ष 2023 में भारत ने कई अलग-अलग खेलों में पदक जीते। एथलेटिक्स ने 2023 में भारत को 29 पदक, जबकि शूटिंग ने 22 पदक दिलाए थे।

2023 के 107 पदकों की तुलना में 2026 का आंकड़ा कम जरूर है, लेकिन 85 पदक अभी भी भारत के एशियन गेम्स इतिहास के सबसे मजबूत प्रदर्शनों में शामिल हैं। इस बार भारतीय तीरंदाज तीरंदाज कुमकुम मोहोड ने महिला व्यक्तिगत रिकर्व में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचा और वह वह एशियन गेम्स में व्यक्तिगत रिकर्व स्वर्ण जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं। यही नहीं भारतीय महिला रिकर्व टीम ने भी स्वर्ण पदक जीता। शुटिग में महिला ट्रेप की व्यक्तिगत स्पर्धा में नीरू धांडा ने स्वर्ण पदक जीत कर इतिहास रचा, भारत को यह उपलब्धि लबे इंतजार के बाद हासिल हुई। इसके साथ साथ नीरू धांडा और कायनन चेनाई ने मिक्स्ड ट्रैप में भी स्वर्ण पदक जीता जबकि प्रणवी उर्स ने महिला व्यक्तिगत गोल्फ में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचा। यह एशियन गेम्स में भारत का पहला महिला व्यक्तिगत गोल्फ स्वर्ण पदक रहा।

हॉकी के साथ साथ क्रिकेट में पुरुष व महिला दोनों वर्गो में भारत को स्वर्ण पदक मिलना भारत की शानदार उपलब्धि रही तो साथ ही आर्चरी, बाक्सिंग, रेसलिंग मे भी भारत ने शानदार प्रदर्शन किया। वर्ष 2023 की तुलना में पदको की संख्या मे कमी का सबसे बड़ा करण एथलेटिक्स और शूटिंग में अपेक्षित पदकों की संख्या कम होना रहा। वर्ष 2023 में एथलेटिक्स और शूटिंग में भारत को कुल 51 पदक मिले थे जिनमें एथलेटिक्स में 29 और शूटिंग में 22 पदक मिले थे लेकिन इस बाद इन दोनों खेलों में इन प्रमुख खेलों से समान स्तर की पदक संख्या नहीं आई जिसका असर कुल पदक संख्या पर पड़ा लेकिन भारतीय खिलाड़ियों ने दिखा दिया कि पदकों की संख्या में कमी के बावजूद भारत अपने चौथे स्थान को बरकरार रखने में सक्षम है। जो भी नुकसान इस वर्ष हुआ भविष्य में इस नुकसान को पूरा करने के साथ साथ पदक तालिका में भी आगे बढ़ने की चुनौती अब भारत के समक्ष है क्योंकि वर्ष 2023 में 107 पदकों की उपलब्धि देखने के बाद भारत के खेल प्रेमी अब भारत को भविष्य में 107 पदकों से आगे ही देखना चाहेंगे।