
ट्रम्प की लोकप्रियता घटने का असर उनकी अपनी पार्टी पर भी दिख रहा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, मुकाबले वाली 62 सीटों में से 41 सीटों पर रिपब्लिकन उम्मीदवार ट्रम्प की कुछ नीतियों से असहमति जता रहे हैं या उनसे दूरी बनाकर चल रहे हैं। इन उम्मीदवारों के सामने मुश्किल यह है कि ट्रम्प के करीब रहने पर उनकी गिरती लोकप्रियता का नुकसान उठाना पड़ सकता है। वहीं, उनसे ज्यादा दूरी बनाने पर ट्रम्प के वफादार समर्थक नाराज हो सकते हैं।
राजीव सक्सेना
नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू दोनों ही चुनाव में हार के डर से जूझ रहे हैं। इन दोनों नेताओं की परेशानी का कारण ईरान युद्ध है, जिसने इतनी मंहगाई फैला दी कि नाराज़ जनता के बीच इनकी लोकप्रियता लगातार गिरती जा रही है। दुनिया की नज़रें इनकी हार-जीत पर टिकी हैं।
ट्रम्प की घबराहट का अंदाज़ा इसी से लग जाता है कि उन्होंने रूस पर सख्त प्रतिबंध लगाने वाले कानून को फिलहाल रोक दिया है। इस कानून के तहत रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाया जा सकता था। इन देशों में चीन, भारत, स्लोवाकिया समेत हंगरी और अजरबैजान शामिल थे।
इतना ही नहीं, बल्कि अब ख़ुद अमेरिका रूस से तेल ख़रीद रहा है। 9 अक्टूबर को ही ट्रम्प ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ डीजल खरीदने की डील की।
दूसरी तरफ़ इजरायल में नेतन्याहू की ख़स्ता हालत को देखकर ख़ुद ट्रम्प को अपील करनी पड़ी है। उन्होंने कहा है कि अगर इजराइल ने बीबी (नेतन्याहू) के अलावा किसी दूसरे नेता को चुना, तो अमेरिका को ईरान के खिलाफ लड़ाई खुद लड़नी पड़ेगी। उन्होंने कहा कि वे ऐसा करने के इच्छुक नहीं हैं। ट्रम्प ने नेतन्याहू को दोबारा प्रधानमंत्री चुनने की अपील की है।
इजराइल में 27 अक्टूबर को होने वाले चुनाव से पहले आए चार सर्वे में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की लिकुड पार्टी, गैडी आइजनकोट की याशर पार्टी से पिछड़ रही है। चारों सर्वे के औसत में याशर को 21.5 और लिकुड को 19 सीटें मिलने का अनुमान है।
हालांकि, किसी भी गठबंधन को बहुमत के लिए जरूरी 61 सीटें मिलती नहीं दिख रहीं। नेतन्याहू के गठबंधन को 49 से 53 और आइजनकोट के नेतृत्व वाले विपक्ष को 50 से 54 सीटें मिलने का अनुमान है। अरब पार्टियों को औसतन 13.75 सीटें मिल सकती हैं, जिससे सरकार बनाने में उनकी भूमिका अहम हो सकती है।
नेतन्याहू के सामने चुनाव के बाद सत्ता गंवाने का खतरा है। उनके अपने दक्षिणपंथी खेमे की छोटी पार्टियां उनके लिए मुश्किल खड़ी कर रही हैं। इनके कारण वोट बंट सकते हैं। वहीं, चुनाव के बाद ये पार्टियां नेतन्याहू की सरकार में शामिल होने से भी इनकार कर सकती हैं। नेतन्याहू इन पार्टियों के वोट अपने पक्ष में लाने की कोशिश कर रहे हैं। दूसरी तरफ, विपक्षी नेता गादी आइजनकोट अपनी पार्टी को विपक्ष का सबसे बड़ा दल बनाने में जुटे हैं, ताकि प्रधानमंत्री पद के लिए उनका दावा मजबूत हो सके।
उधर, अमेरिका में 3 नवंबर को होने वाले मिडटर्म चुनाव राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की पार्टी के लिए मुश्किल खड़ी कर सकते हैं। महँगाई, ईरान के साथ जंग और ट्रम्प की घटती लोकप्रियता के बीच रिपब्लिकन पार्टी के लिए काँग्रेस में अपना बहुमत बचाना चुनौती बन गया है। 10 बड़े पब्लिक पोल में से सिर्फ 1 में रिपब्लिकन पार्टी आगे है।
मिडटर्म चुनाव में राष्ट्रपति नहीं चुना जाता। इसमें अमेरिकी संसद यानी काँग्रेस के दोनों सदनों- हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट की सीटों के लिए वोटिंग होती है। फिलहाल दोनों सदनों में रिपब्लिकन पार्टी को मामूली बहुमत है। अगर डेमोक्रेट्स जरूरी सीटें जीत लेते हैं, तो वे एक या दोनों सदनों में बहुमत हासिल कर सकते हैं। इससे ट्रम्प के लिए अपने एजेंडे को लागू करना मुश्किल हो सकता है।
अमेरिका में ट्रम्प के कामकाज से खुश लोगों की संख्या घट रही है। अलग-अलग सर्वे में सिर्फ 30 से 36% लोग ही उनके काम से खुश हैं। एनबीसी न्यूज के सर्वे में 34% लोगों ने ट्रम्प के कामकाज को सही बताया। वॉशिंगटन पोस्ट-एबीसी न्यूज के सर्वे में 33% और फॉक्स न्यूज के सर्वे में 36%लोगों ने उनका समर्थन किया। जबकि प्यू रिसर्च सेंटर के सर्वे में ट्रम्प को सबसे कम, यानी 30% लोगों का समर्थन मिला। ये ट्रम्प के पहले कार्यकाल से भी कम हैं। पहले कार्यकाल में ट्रम्प की अप्रूवल रेटिंग सबसे कम जनवरी 2021 में संसद में दंगाईयों के घुसने वाली घटना के बाद हुई थी। तब उनकी रेटिंग 34% पहुंच गई थी।
2024 के राष्ट्रपति चुनाव में ट्रम्प ने वादा किया था कि वे महँगाई कम करेंगे और लोगों का खर्च घटाएंगे। लेकिन अब बढ़ती कीमतें उनकी पार्टी के लिए परेशानी बन रही हैं। अमेरिका में अंडे, दूध, ब्रेड, मांस और सब्जियां जैसी बुनियादी चीजों के दाम 20% से 30% तक महंगे हो चुके हैं। घर का किराया औसतन 1.60 लाख रुपए पहुंच गया है जो अब तक सबसे ऊंचा स्तर है। तेल-गैस की कीमतों में करीब 20% का इजाफा हुआ है। हालांकि लोगों की तनख्वाह में थोड़ी बढ़ोतरी हुई है, लेकिन महँगाई की वजह से उन्हें इसका फायदा नहीं मिला।
रॉयटर्स-इप्सोस के सर्वे में 78% लोगों ने कहा कि चीजों के दाम उनकी कमाई से ज्यादा तेजी से बढ़ रहे हैं। AP की रिपोर्ट के मुताबिक, 65% अमेरिकी मानते हैं कि महँगाई के लिए ट्रम्प की नीतियां जिम्मेदार हैं।
राष्ट्रीय सर्वेक्षणों के मुताबिक लगभग 37% से अधिक अमेरिकी महँगाई और बढ़ती कीमतों को देश की सबसे बड़ी और गंभीर समस्या मानते हैं। ऐसे में महँगाई कम करना ट्रम्प के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।
ईरान के साथ जंग ट्रम्प के लिए एक और परेशानी बन गई है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, जंग के कारण पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर दबाव बढ़ा है। इससे अमेरिकी लोगों का रोजमर्रा का खर्च बढ़ सकता है। एक सर्वे में सिर्फ 29% लोगों ने ईरान जंग को संभालने के ट्रम्प के तरीके को सही माना। वहीं, फॉक्स न्यूज के सर्वे में 64% लोगों ने उनकी विदेश नीति को गलत बताया।
ट्रम्प की लोकप्रियता घटने का असर उनकी अपनी पार्टी पर भी दिख रहा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, मुकाबले वाली 62 सीटों में से 41 सीटों पर रिपब्लिकन उम्मीदवार ट्रम्प की कुछ नीतियों से असहमति जता रहे हैं या उनसे दूरी बनाकर चल रहे हैं। इन उम्मीदवारों के सामने मुश्किल यह है कि ट्रम्प के करीब रहने पर उनकी गिरती लोकप्रियता का नुकसान उठाना पड़ सकता है। वहीं, उनसे ज्यादा दूरी बनाने पर ट्रम्प के वफादार समर्थक नाराज हो सकते हैं।
इस बीच ईरान के एक बयान ने ट्रम्प पर और चोट पहुंचाई है। ईरान ने मंगलवार को कहा कि वह अपना एक ग्राम भी एनरिच्ड यूरेनियम किसी दूसरे देश नहीं भेजेगा। ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सेक्रेटरी मोहसिन रजाई ने कहा कि जब तक अमेरिका भरोसा जीतने के लिए ठोस कदम नहीं उठाता और ईरान की सभी शर्तें नहीं मानता, तब तक बातचीत नहीं होगी।
ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने कहा कि अमेरिका तब तक ईरान का भरोसा नहीं जीत सकता, जब तक वह उसकी सात शर्तें पूरी नहीं करता। ये शर्तें पिछले महीने होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोलने के लिए रखी गई थीं।
असल में ट्रम्प के ऊलजलूल टैरिफ़ और फिर ईरान युद्ध के बाद विश्व के देशों के समीकरण बड़ी तेज़ी से बदले हैं। इसलिए सबकी नज़रें अमेरिका के चुनावों पर टिकी हैं। इन चुनावों के नतीज़े दुनिया में काफ़ी कुछ बदलाव ला सकते हैं।




