- द्विपक्षीय संबधों को मजबूत करने की नई पहल
भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल की अमेरिका यात्रा से भारत ही नही बल्कि अमेरिका के उद्योग जगत को भी कई उम्मीदें है। गोयल की इस यात्रा को भारत-अमेरिका आर्थिक रिश्तों को मजबूत करने की दिशा में जहां महत्वपूर्ण माना जा रहा है वहीं भारत में निवेश की दृष्टि से भी इस यात्रा के कई मायनें है। यदि गोयल की यह यात्रा सफल रही तो निश्चित रूप से भविष्य में इसके सकारात्मक परिणाम दिखाई देंगे।
भारत-अमेरिका के बीच तेजी से विकसित होते आर्थिक और वाणिज्यिक संबंधों को और अधिक सुदृढ़, व्यापक बनाने के लिये केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल अमेरिका के दौरे पर गये है। वहां वह जहां द्विपक्षीय आर्थिक रिश्तों को मजबूत बनाने का रास्ता तलाश रहे हैं तो साथ ही भारत में निवेश के अवसर भी खोज रहे है। गोयल ने अपने दौरे के दौरान न्यूयॉर्क में अमेरिकी कॉरपोरेट जगत की कई अग्रणी कंपनियों के शीर्ष नेतृत्व के साथ महत्वपूर्ण और परिणामोन्मुखी बैठकें कीं। इन उच्चस्तरीय मुलाकातों में भारत की विशाल आर्थिक संभावनाओं, आकर्षक निवेश अवसरों और विभिन्न रणनीतिक क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को नई गति देने पर व्यापक विचार-विमर्श हुआ है।
गोयल ने वैश्विक निवेश परिदृश्य में भारत की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करते हुए अमेरिका की प्रमुख कंपनियों को भारत की तेजी से विस्तारित होती अर्थव्यवस्था, विशाल उपभोक्ता बाजार और उभरते निवेश अवसरों का लाभ उठाने के लिए आमंत्रित किया। गोयल ने वहां ब्लैकस्टोन के अध्यक्ष एवं सीओओ श्री जोनाथन ग्रे तथा ब्लैकस्टोन के इंटरनेशनल प्राइवेट इक्विटी व्यवसाय के अध्यक्ष प्रकाश मेलवानी के अलावा न्यूबर्गर बर्मन के चेयरमैन एवं सीईओ जार्ज वॉकर और उनकी वरिष्ठ नेतृत्व टीम के साथ भी विस्तृत विचार-विमर्श किया। इस दौरान भारत-अमेरिका के निवेश संबंधों को और गहरा करने तथा वित्तीय सेवाओं एवं संपत्ति प्रबंधन के क्षेत्र में सहयोग की नई संभावनाओं पर चर्चा हुई।
गोयल ने वहां भारत के तेजी से उभरते ब्यूटी एवं पर्सनल केयर बाजार और विनिर्माण एवं सोर्सिंग की अपार संभावनाओं पर भी चर्चा की और इस संबध में द एस्टी लॉडर कंपनीज़ के अध्यक्ष एवं सीईओ स्टीफ़न डी ला फ़ेवेरी के साथ बैठक कर उन्हें भारत में निवेश का आमंत्रण दिया। बातचीत में भारत को वैश्विक विनिर्माण और सोर्सिंग केंद्र के रूप में विकसित करने की संभावनाओं पर भी विचार हुआ।
तकनीकी क्षेत्र में भारत की बढ़ती वैश्विक क्षमता और अमेरिका के साथ प्रौद्योगिकी सहयोग को नई दिशा देने के उद्देश्य से गोयल ने आईबीएमइ के चेयरमैन एवं सीईओ अरविंद कृष्णा से मुलाकात की। बैठक में भारत में आईबीएम की भागीदारी को और मजबूत करने तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर, क्वांटम कंप्यूटिंग और अन्य उभरती प्रौद्योगिकियों में सहयोग के विस्तार पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया। वहीं मेटलाइफ के अध्यक्ष एवं सीईओ मिशेल ए. खलाफ के साथ हुई बैठक में भारत के विशाल बीमा बाजार और वित्तीय सेवा क्षेत्र में कंपनी के विस्तार की संभावनाओं पर चर्चा की गई। भारत के बढ़ते आर्थिक आधार और वित्तीय समावेशन की व्यापक संभावनाओं को देखते हुए इस क्षेत्र में नए अवसरों की पहचान पर जोर दिया गया।
श्री गोयल ने जनरल अटलांटिक के चेयरमैन एवं सीईओ विलियम ई. फोर्ड से भी कर मौजूदा निवेश एवं व्यापारिक संबंधों को और अधिक मजबूत करने तथा भविष्य में नई साझेदारियों और निवेश के अवसर तलाशने पर सार्थक चर्चा हुई। इसी क्रम में एआईए ग्रुप के गैर-कार्यकारी अध्यक्ष मार्क टकर के साथ हुई बैठक में भारत में एआईए की मौजूदा भागीदारी और बीमा एवं वित्तीय सेवा क्षेत्रों में उपलब्ध व्यापक अवसरों पर चर्चा हुई। इन सभी उच्चस्तरीय बैठकों ने यह स्पष्ट संकेत दिया कि भारत-अमेरिका आर्थिक साझेदारी अब पारंपरिक व्यापारिक संबंधों से आगे बढ़कर निवेश, प्रौद्योगिकी, वित्तीय सेवाओं, विनिर्माण, ऊर्जा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और उभरती तकनीकों जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में व्यापक एवं दीर्घकालिक साझेदारी का रूप ले रही है।
गोयल की न्यूयॉर्क यात्रा के दौरान हुई ये चर्चाएं भारत की मजबूत आर्थिक बुनियाद, विशाल बाजार, कुशल मानव संसाधन और निवेश-अनुकूल वातावरणको वैश्विक निवेशकों के समक्ष प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने का महत्वपूर्ण मंच बनीं। साथ ही इन बैठकों ने भारत-अमेरिका के आर्थिक संबंधों को और अधिक गतिशील, गहन और पारस्परिक रूप से लाभकारीबनाने की दिशा में नई संभावनाओं के द्वार खोले हैं।


