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हार से पंगु हुए ट्रम्प, दोनों सदनों में डेमोक्रेट का कब्जा

हाउस में कुल 435 सीटें हैं और सभी सीटों पर चुनाव हुए हैं। विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी ने 234 सीटें जबकि ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी ने 139 सीटें जीती हैं। जबकि सीनेट में कुल 100 सीटें हैं। बहुमत के लिए 51 सदस्यों का समर्थन जरूरी है। इस बार सीनेट की 35 सीटों पर चुनाव हुए

राजीव सक्सेना
नई दिल्ली। मनमानी, झूठ, फ़रेब और अहंकार से लबालब रहकर पूरी दुनिया पर डंडा घुमाने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प मध्यवर्ती चुनावों में इतनी बुरी तरह हारे हैं कि इतिहास पुरुष बनने की उनकी इच्छा पूरी हो गयी। ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी ऐसी जगह भी हार गई, जहाँ वह 95 सालों से जीतती रही थी।

वैसे, चुनाव नतीजे के दिन तक ट्रम्प की अकड़ बनी रही। उन्होंने कहा कि वे हारे तो अपनी ‘वीटो’ शक्ति का इस्तेमाल करेंगे। लेकिन नतीजे आने पर दोनों सदनों में बहुमत खोने के बाद ट्रम्प ने डेमोक्रेट के साथ मिलकर काम करने की इच्छा जताई है।

हालांकि ट्रम्प अभी भी राष्ट्रपति बने रहेंगे। अमेरिका में राष्ट्रपति को कुछ विशेष शक्तियां हासिल होती हैं।
इसके बावज़ूद इन नतीजों के बाद ट्रम्प की हालत ऐसी हो जाएगी कि विपक्षी डेमोक्रेट की मर्ज़ी के बिना वे कोई बड़ा फ़ैसला नहीं कर पाएंगे। अमेरिकी जनता ने ट्रम्प को इतनी बुरी तरह हराया है कि अब यह कहना भी मुश्किल है कि वे अपने राष्ट्रपति पद की बाक़ी बची दो साल की अवधि को गुज़ार भी पाएंगे या नहीं।

उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने माना है कि अमेरिकी जनता की सबसे ज़्यादा नाराज़गी का कारण ईरान युद्ध और उसकी वजह से पैदा हुई मंहगाई थी। नाराज़गी की एक वजह इजरायल को पैसा भेजना भी था। नतीज़ा यह हुआ कि ईरान को बम से उड़ाने की धमकी देने वाले, नॉर्वे को गाली देने वाले और अपने लिए नोबल पीस प्राइज मांगने वाले ट्रम्प अमेरिकी मिडटर्म चुनाव इतनी बुरी तरह हारे कि उनकी रिपब्लिकन पार्टी ने सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में बहुमत गंवा दिया। विपक्षी पार्टी डेमोक्रेट्स को अमेरिका की जनता खासकर महिलाओं ने भर-भर के वोट दिए।

हाउस में कुल 435 सीटें हैं और सभी सीटों पर चुनाव हुए हैं। विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी ने 234 सीटें जबकि ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी ने 139 सीटें जीती हैं। जबकि सीनेट में कुल 100 सीटें हैं। बहुमत के लिए 51 सदस्यों का समर्थन जरूरी है। इस बार सीनेट की 35 सीटों पर चुनाव हुए। डेमोक्रेट्स ने 20 सीटें जीती हैं। अब सीनेट में डेमोक्रेट्स के पास 54 सीटें हो गई हैं। अभी 2 सीटों पर फैसला आना बाकी है। इन नतीजों को मिलाकर रिपब्लिकन पार्टी के पास बस 44 सीटें बची हैं। इसके अलावा राज्यों के गवर्नर के चुनाव में कुल 36 सीटों में से 34 राज्यों के नतीजे आ चुके हैं। 22 डेमोक्रेट्स और 12 रिपब्लिकन ने सीटें जीती हैं। 2 राज्यों में वोटों की गिनती जारी है।

ट्रम्प की हार के साथ मिशिगन से डेमोक्रेटिक उम्मीदवार अब्दुल अल सैयद की चर्चा भी दुनिया भर में हो रही है। ट्रम्प ने अब्दुल को खुले मंच से ‘जिहादी’ कहा था। अब वे अमेरिकी इतिहास में सीनेटर चुने जाने वाले पहले मुस्लिम बन गए हैं। 25 अक्टूबर को मिशिगन में एक चुनावी रैली के दौरान ट्रम्प ने कहा था,
‘मैं यहां एक जिहादी और मुस्लिम ब्रदरहुड के सदस्य को अमेरिकी सीनेटर बनने से रोकने आया हूं।’

इसी तरह टेक्सास में डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार जेम्स तालारिको ने रिपब्लिकन उम्मीदवार केन पैक्सटन को हरा दिया। पैक्सटन टेक्सास के अटॉर्नी जनरल रह चुके हैं और कई विवादों में उनका नाम आया था। इस जीत के साथ तालारिको 1988 के बाद टेक्सास से सीनेट चुनाव जीतने वाले पहले डेमोक्रेट बन गए।

अब सबकी नज़र इसपर है कि डेमोक्रेट्स जीते अब क्या करेंगे? जनवरी में नई संसद शुरू होने के बाद डेमोक्रेट्स कमान संभालेंगे। वे ट्रम्प प्रशासन के कामकाज की जांच कर सकेंगे। इसमें निर्माण प्रोजेक्ट की जांच, ट्रम्प के परिवार पर निजी फायदे के आरोप, ईरान जंग, इमिग्रेशन पर सख्ती, सरकारी कर्मचारियों की छंटनी, AI और महँगाई जैसे मुद्दे शामिल होंगे।

डेमोक्रेट्स ट्रम्प की नियुक्तियां को भी रोक सकेंगे। राष्ट्रपति मंत्रियों, बड़े अधिकारियों और जजों के नाम तय करते हैं, लेकिन सीनेट की मंजूरी जरूरी होती है। अब सीनेट में डेमोक्रेट्स का बहुमत होगा। ऐसे में वे ट्रम्प के चुने हुए लोगों की नियुक्तियों को रोक सकते हैं। लेकिन वे ट्रम्प के वीटो को नहीं पलट पाएंगे। ट्रम्प किसी कानून को मंजूरी देने से इनकार कर सकते हैं। इसे वीटो कहते हैं। संसद के दोनों सदन दो-तिहाई बहुमत से इसे पलट सकते हैं। लेकिन डेमोक्रेट्स के पास इतना बहुमत नहीं है।

व्हाइट हाउस ने सोशल मीडिया पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की एक तस्वीर पोस्ट की है। इसमें ट्रम्प अपने ऑफिस में नजर आ रहे हैं। तस्वीर पर लिखा है- ‘याद दिला दें, ट्रम्प अब भी आपके राष्ट्रपति हैं। दूसरी तरफ़ चर्चा यह भी है कि ट्रम्प के ख़िलाफ़ महाभियोग प्रस्ताव लाया जा सकता है।

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प की नीतियों से नाराज कुछ देशों के नेताओं ने डेमोक्रेटिक पार्टी की बड़ी जीत का स्वागत किया है। स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने कहा कि अमेरिकी लोगों ने नफरत फैलाने, जलवायु परिवर्तन को न मानने और अमीर-ताकतवर लोगों के दबदबे के खिलाफ वोट दिया है। नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गार स्टोर ने कहा कि अमेरिका में अब ऐसे लोग अपनी बात रख रहे हैं, जिनकी सोच नॉर्वे से मिलती है। हाल ही में ट्रम्प ने नोबेल शांति पुरस्कार न मिलने को लेकर नॉर्वे को गाली दी थी।

दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा ने कहा कि इन चुनावों से दुनिया के देशों के रिश्तों में एक नए दौर की शुरुआत हो सकती है। ट्रम्प पहले दक्षिण अफ्रीका पर वहां के गोरे लोगों के खिलाफ नरसंहार करने का आरोप लगा चुके हैं। जबकि यूरोपीय संसद की उपाध्यक्ष क्रिस्टेल शाल्डेमोस ने कहा कि चुनाव के नतीजों से उन्हें थोड़ी उम्मीद जगी है। उन्हें लगता है कि अब अमेरिका यूक्रेन की और मदद कर सकता है।

आने वाले कुछ समय में इन चुनावी नतीजों का असर भारत सहित पूरी दुनिया के देशों में भी देखने को मिल सकता है। अभी यह साफ़ नहीं है कि यूक्रेन और ईरान युद्ध का अब क्या होगा? लेकिन इससे एक चीज़ के साफ़ संकेत मिले हैं कि इजरायल में नेतन्याहू के लिए मुसीबत भरे दिनों की शुरुआत हो चुकी है, जो अपने देश में चुनाव हार चुके हैं। उन्हें ट्रम्प का जबरदस्त समर्थन था। नेतन्याहू के खिलाफ कुछ मुकदमें हैं, जो अब उनके लिए बुरे भविष्य का सबब बन सकते हैं। कोई ताज्जुब नहीं कि आने वाले समय में उनके कुछ राज़ भी सामने आयें।