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नेतन्याहू बहुमत से दूर, इजरायल में अब किसकी बनेगी सरकार?

ख़बर है कि गादी आइजनकोट के नेतृत्व वाला विपक्षी खेमा संसद अध्यक्ष अमीर ओहाना को पद से हटाने के लिए अरब पार्टियों का समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहा है, क्योंकि ओहाना, नेतन्याहू की लिकुड पार्टी के सदस्य हैं। संसद अध्यक्ष पद के लिए अभी किसी नाम पर सहमति नहीं बनी है। रिपोर्ट के मुताबिक, यिस्राइल बेतेनु पार्टी के सांसद ओदेद फोरर और आइजनकोट की याशर पार्टी के एलेजर स्टर्न के नामों पर चर्चा हो रही है।

राजीव सक्सेना
नई दिल्ली।
इसराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू सत्ता में वापसी की अपनी कोशिशों में क़ामयाब हो पाएंगे या नहीं? यह कहना अभी मुश्किल है। लेकिन एक बात तय है कि इजराइल में किसकी सरकार बनेगी, यह फ़ैसला अरब पार्टियाँ करेंगी, क्योंकि नेतन्याहू और विपक्षी नेता गादी आइजनकोट, दोनों बहुमत से दूर रह गए हैं।

चुनाव के नतीजों को लेकर तस्वीर लगातार बदल रही है। सरकार बनाने के लिए संसद की 120 सीटों में से कम से कम 61 सीटें जरूरी हैं। जबकि 93% वोटों की गिनती के बाद नेतन्याहू का गठबंधन 53 सीटों और आइजनकोट का विपक्षी गठबंधन 48 सीटों पर आगे है। जबकि अरब पार्टियों को कुल 19 सीटें मिलती दिख रही हैं। यानी सरकार बनाने के लिए उनका समर्थन ज़रूरी होगा।

इस बीच ख़बर है कि गादी आइजनकोट के नेतृत्व वाला विपक्षी खेमा संसद अध्यक्ष अमीर ओहाना को पद से हटाने के लिए अरब पार्टियों का समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहा है, क्योंकि ओहाना, नेतन्याहू की लिकुड पार्टी के सदस्य हैं। संसद अध्यक्ष पद के लिए अभी किसी नाम पर सहमति नहीं बनी है। रिपोर्ट के मुताबिक, यिस्राइल बेतेनु पार्टी के सांसद ओदेद फोरर और आइजनकोट की याशर पार्टी के एलेजर स्टर्न के नामों पर चर्चा हो रही है।

उधर, नेतन्याहू की पार्टी लिकुड ने अरब पार्टियों पर चुनाव में धांधली करने का आरोप लगाया है। पार्टी ने पुलिस और सुरक्षा एजेंसी शिन बेट से जांच की मांग की है। लिकुड ने आरोप लगाया कि चुनाव में वोटरों को धमकाया गया, हिंसा हुई और फर्जी तरीके से वोट डाले गए। हालांकि, केंद्रीय चुनाव आयोग के एक अधिकारी ने धांधली के आरोपों को खारिज किया है।

प्रधानमंत्री नेतन्याहू की लिकुड पार्टी को शक है कि कतर और तुर्किये से इजराइल और वेस्ट बैंक में पैसे भेजे गए। इनका इस्तेमाल अरब नागरिकों की फंडिंग के लिए किया गया। चुनाव आयोग ने जांच एजेंसी ‘शिन बेट’ को मामले की जांच के आदेश दिए हैं। द टाइम्स ऑफ इजराइल के मुताबिक, एजेंसी एक हफ्ते में जांच रिपोर्ट सौंपेगी। चुनाव खत्म होने के बाद दूसरे दिन 29 अक्टूबर को भी मतों की गिनती जारी है।

इजराइल में चुनाव के अलग नियम हैं। वहाँ लोग नेता को नहीं, बल्कि उसकी पार्टी को वोट देते हैं। हर पार्टी अपने उम्मीदवारों की एक सूची बनाती है। पूरे देश में पार्टी को मिले वोटों के आधार पर तय होता है कि उसे संसद में कितनी सीटें मिलेंगी। किसी पार्टी को कुल वैध वोटों में से कम से कम 3.25% वोट हासिल करने होते हैं। इससे कम वोट मिलने पर पार्टी को संसद में कोई सीट नहीं मिलती।

अरब पार्टियों की जॉइंट लिस्ट 12 और राअम 7 सीटों पर आगे हैं। दोनों को मिलाकर 19 सीटें हो रही हैं। जो इजराइल के चुनावी इतिहास में अरब पार्टियों का अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। इससे पहले 2020 के चुनाव में इन पार्टियों ने 15 सीटें जीती थीं।

वैसे तो इजराइल के राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग की भूमिका आमतौर पर औपचारिक ही है। लेकिन आम चुनाव के बाद उन्हें तय करना होता है कि किस नेता को सरकार बनाने का मौका दिया जाए। यह जरूरी नहीं है कि वह सबसे ज्यादा वोट पाने वाली पार्टी के नेता को ही चुने। वह उस नेता को भी मौका दे सकते हैं, जिसके पास दूसरी पार्टियों का समर्थन जुटाकर संसद में बहुमत साबित करने की ज्यादा संभावना हो।

वैसे गाजा में जिस तरह बड़े पैमाने पर लोग मारे गए हैं, उसके बाद अरब पार्टियों का समर्थन हासिल कर पाना नेतन्याहू के लिए आसान नहीं होगा। इजराइल में जिस जॉइंट लिस्ट गठबंधन को 12 सीटें मिलती दिख रही हैं, वह इजराइल की अरब आबादी के अधिकारों की बात करने वाला राजनीतिक गठबंधन है। गठबंधन में अरब नेताओं के साथ यहूदी नेता भी हैं। इसमें तीन अलग-अलग पार्टियां शामिल हैं। इनमें एक हदाश वामपंथी पार्टी है। यह अरब और यहूदी नागरिकों की समानता, मजदूरों के अधिकारों और फिलिस्तीन के साथ शांति की वकालत करती है।

दूसरी का नाम ताल है। यह अहमद तिबी की पार्टी है। यह अरब नागरिकों के समान अधिकार, शिक्षा और रोजगार के बेहतर अवसरों और फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना का समर्थन करती है। तीसरी बलद है, जो अरब राष्ट्रवादी विचारधारा वाली धर्मनिरपेक्ष पार्टी है। यह इजराइल को ऐसा देश बनाने की वकालत करती है, जहां सभी नागरिकों को समान अधिकार मिलें। इसके अलावा एक पार्टी राअम है जो सीटों पर आगे हैं।

पूर्व सेना प्रमुख और विपक्षी नेता गादी आइजेनकोट की यशर पार्टी नेतन्याहू की लिकुड पार्टी को कड़ी चुनौती दे रही है। यह चुनाव 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले के बाद इसराइल में पहला आम चुनाव है। इसके नतीजे नेतन्याहू के राजनीतिक भविष्य के साथ-साथ इसराइल की सुरक्षा नीति, ईरान के साथ टकराव और गाजा युद्ध के बाद की राजनीति को भी प्रभावित कर सकते हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया कि इजरायल के चुनाव में बेंजामिन नेतन्याहू को उनके समर्थन से काफी फायदा हुआ है। ट्रंप ने एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि जब उन्होंने नेतन्याहू का समर्थन किया, तब इससे उन्हें काफी मदद मिली।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इसराइल में मतगणना 28 अक्टूबर को जारी है। अंतिम नतीजा 30 अक्टूबर तक आने की उम्मीद है। लेकिन आधिकारिक नतीजों का प्रकाशन 4 नवंबर को होगा। सरकार गठन की प्रक्रिया राष्ट्रपति के परामर्श के बाद होगी। सरकार बनाने की समयसीमा अधिकतम 42 दिन है।

इस चुनाव में नेतन्याहू की लिकुड पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बन सकती है, लेकिन बहुमत के लिए गठबंधन सहयोगियों की जरूरत बनी रहेगी। गादी आइजेनकोट का विपक्षी गठबंधन भी सरकार बनाने की कोशिश करेगा। ऐसे में अरब पार्टियों और छोटे राजनीतिक दलों की भूमिका निर्णायक हो सकती है। फिलहाल इसराइल में चुनावी मुकाबला बेहद करीबी है। सरकार गठन का अंतिम फैसला गठबंधन की राजनीति और आने वाले दिनों की बातचीत पर निर्भर करेगा।